श्री राम का जीवन एक आदर्श का जीवन है। उनके पिता राजा दशरथ के तीन पत्नियाँ थीं - कैकेयी, कौशल्या और सुमित्रा। दशरथ ने अयोध्या के राजा के रूप में अपने जीवन में सदैव धर्म का पालन किया। जब राम का जन्म हुआ, तो ऋषियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक एक दिन अधर्म का विनाश करेगा। राम ने बाल्यकाल से ही सभी शास्त्रों का अध्ययन किया और वन में गुरु विश्वामित्र के आश्रम में अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की। उनके जीवन में सीता से विवाह, वनवास, सीता का अपहरण, रावण से युद्ध और अयोध्या वापसी - ये सभी घटनाएँ धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक हैं।